शिक्षाविद डा. विशन लाल गौड़ को सम्मानित करते हुए नीतिशतकम के काव्यानुवाद का किया विमोचन

 आज दिनांक 22 दिसंबर 2024 को ज्ञानपीठ केन्द्र 1, स्वरुप पार्क जी0 टी0 रोड साहिबाबाद के प्रांगण में लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट द्वारा मूर्धन्य विद्वान डा0 विशन लाल गौड़ द्वारा भर्तृहरि विरचितम नीतिशतकम के काव्यानुवाद का “लोकाभिनंदन समारोह” आयोजित किया गया, समारोह की अध्यक्षता श्रीमती सीमा श्रीवास्तव प्रधानाचार्य शहीद विजय सिंह पथिक सरस्वती विद्या मंदिर (कुटी) भोपुरा ने किया, काव्यानुवाद का विमोचन संस्था के संस्थापक/अध्यक्ष शिक्षाविद राम दुलार यादव ने किया, इस अवसर पर डा0 विशन लाल गौड़ को माला पहना, शाल भेंटकर तथा अभिनन्दन पत्र पढ़कर समाजवादी पार्टी के महानगराध्य्क्ष वीरेन्द्र यादव एडवोकेट ने सम्मानित किया, कार्यक्रम की अध्यक्षा को समाज सेविका फूलमती यादव ने माला पहनाकर तथा डा0 सरोज यादव ने शाल भेंट किया। समारोह को लेखक अमर जीत सिंह कलिंगा, पर्यावरण विद कालीचरण चौधरी, संविधान विद कैलाश चन्द, डा0 आर0 पी0 सिंह, जे0 एन0 शर्मा, सुभाष त्यागी, डा0 सरोज यादव ने भी संबोधित किया, सञ्चालन श्रमिक नेता अनिल मिश्र ने किया, हुकुम सिंह, राजेन्द्र सिंह ने गीत और भजन गाकर सभी कार्यक्रम में शामिल विद्वानों को आत्म विभोर कर दिया, के0 सी0 शास्त्री ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया, जोरदार नारे डा0 विशन लाल गौड़ के सम्मान में लगाये गये।

          कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षाविद राम दुलार यादव ने कहा कि “काव्यानुवाद” हिंदी भाषा में नीतिशतकम का कर डा0 विशन लाल गौड़ “व्योमशेषर” ने लोक को भर्तृहरि की कृति को समझने और उससे जीवन में प्रेरणा लेने का मार्ग प्रशस्त किया है। इस कृति ने समाज को शिक्षा के महत्व को समझने के साथ-साथ निर्भीकता पूर्वक न्याय पथ पर चलने की ओर प्रेरित करने का कार्य किया, समाज में समता, समानता, न्याय और बंधुता का भाव मिलकर रहने में और धन के महत्त्व का भी सारगर्भित वर्णन है, “साहित्य समाज का दर्पण है” आज देश में नफ़रत, असहिष्णुता, अहंकार, अनाचार का वातावरण बन रहा है, वह नीतिशतकम से प्रेरणा लेकर देश में सद्भाव, भाईचारा की भावना को पैदा किया जा सकता है।

डा0 विशन लाल गौड़ ने कहा कि “शिक्षक राजनैतिक, सामाजिक और शैक्षणिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का कार्य करता है, वह बहादुर और निर्भीक नवजवान पीढ़ी का मार्गदर्शन करता है, जिससे आदर्श नागरिक की भूमिका निभाते हुए लोग देश और समाज का कल्याण कर सकें“। आज इस काव्यानुवाद का विमोचन अपने शिष्य शिक्षाविद राम दुलार यादव से कराकर मै अभिभूत हूँ, मेरा मानना है कि गाँव, देहात और किसानों के घरों में पैदा हुए नवजवान देश को आजाद कराने और क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने का कार्य किया, शहीदे आजम भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस, अशफाकउल्लाह खां प्रमुख है, उन्होंने कहा कि जनता गरीब होती जा रही है, बाबा राज्य चला रहे है, क्रान्ति परिवर्तन लाना आवश्यक है, जिससे आर्थिक असमानता की खांई को कम किया जा सके।

पुस्तक विमोचन में प्रमुख लोगों ने भाग लिया, राम दुलार यादव, सीमा श्रीवास्तव, डा0 आर0 पी0 सिंह, सुभाष त्यागी, वीरेन्द्र यादव एडवोकेट, सरदार अमर जीत सिंह कलिंगा, फूलमती यादव, डा0 सरोज यादव, अनिल मिश्र, संजीव गौड़, अजय रस्तोगी एडवोकेट, जनार्दन शर्मा, कैलाश चन्द, सम्राट सिंह यादव, डा0 देवकर्ण चौहान, एच0 एल 0 विद्यार्थी, दीपक सिन्हा एडवोकेट, वैद्य राज कुमार गौतम, एस0 एन0 अवस्थी, ईशान गौड़, चक्रधारी दूबे चौधरी कालीचरण, एस0 एस0 प्रसाद, अमृत लाल चौरसिया, जे0 एन0 शर्मा, अंकुर यादव एडवोकेट, अंशु ठाकुर, गुड्डू यादव, परमानन्द, राम यादव आदि प्रमुख सैकड़ों ज्ञानपीठ के साथियों ने स्वागत किया। विनोद त्रिपाठी ने भजन प्रस्तुत किया।









                                                                                                                             भवदीय

 

                                                                                                                       हरिशंकर यादव 

                                                                                                                       (कार्यालय मंत्री)

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